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Breast cancer ko kese thik kare

क्या है ब्रेस्ट कैंसर और यह किस कारण से होता है कैंसर एक बहुत खतरनाक और बड़ी बीमारी है आप सभी जानते हैं की कैंसर के कई तरह के प्रकार है जिसमें ब्रेस्ट कैंसर आज के समय में सबसे ज्यादा फैलने वाला कैंसर है यह हमारे देश में 100 में से 12 से 15 महिलाओं में आम बात है यानी 100 में से 15 महिलाएं आज ब्रेस्ट कैंसर की शिकार है ब्रेस्ट कैंसर को यदि समय पर जान लिया जाए और इसका समय पर पता लग जाए कि आप को ब्रेस्ट कैंसर है तो इसका इलाज संभव और बहुत ही छोटा है और यदि इसका पता एक समय के बाद लगे तो इसका इलाज महंगा भी है और परेशानी दायक भी है इसके इलाज में कई सारी स्टेप्स होती हैं जिनसे मरीज को काफी सारा दर्द। एक लंबे समय तक सहन करना पड़ता है आखिर कैंसर होता क्या है यानी ब्रेस्ट कैंसर क्या होता है शरीर के किसी हिस्से में कोशिकाओं की असामान्य और अनियंत्रित वृद्धि को कैंसर कहते हैं और यह होता कैसे है जब शरीर में बने टिशु लगातार बढ़ते रहते हैं और शरीर के एक हिस्से से दूसरे में खून के साथ पहुंच जाते हैं और नई जगह पहुंचकर वहा भी अपने विस्तार को कंटिन्यू रखते हैं यानी बढ़ते रहते हैं इसे कैंसर कहते  है इसे...

हिप्स को कम करने के आसान और घरेलु तरीके

आज हम इस आर्टिकल में जानेंगे कि हिप्स या जांघो की चर्बी को कैसे कम करे "हिप्स को कम करने के आसान और घरेलु तरीके" आज के समय में हर लड़की सुंदर दिखना चाहती है चाहे आप की हाइट कम हो या ज्यादा और अगर ऐसे में आप के हिप्स पर चर्बी ज्यादा है या कहे तो आपकी जांघो पर काफी मोटी है तो आपकी बॉडी का पूरा लुक खराब हो जाता है आप खुद को फिट महसूस नहीं करते और यह सही भी है यह चर्बी आपकी पूरी सुंदरता को खराब कर देता है और आप दिखने में विडोल से लगने लगते हैं।  हिप्स की चर्बी बढ़ने से आपको और कई सारी परेशानियां भी होती हैं जैसे चलने  उतरने में आपके पैर यानी जाँघे आपस में रगड़ती हैं जिससे दाद,खाज,खुजली और इनफेक्शन जैसी बीमारियां हो जाती हैं और हिप्स की चर्बी वडना मतलब  मोटापे का आना और धीरे-धीरे यह चर्बी आपके गले आपके हाथ और गर्दन को भी घेर लेती है।  अगर आप इस आर्टिकल में दिए हुए उपायों को नियमित रूप से करें और थोड़ा ध्यान रखें तो आप एक अच्छे और फिट बॉडी पा सकते हैं आपकी हिप्स टाइट और सुडोल होंगे और जांगे भी बिल्कुल फिट होंगी।  हिप्स और जांघों की चर्बी कम करने के घरेलू आ...

कब्ज से राहत पाने के आसान तरीके

कब्ज से राहत पाने के आसान तरीके - पेट में कब्ज होना बहुत ही आम बात है और इससे होने वाली समस्याएं बहुत बड़ी है | पेट में कब्ज कोई बीमारी नहीं है यह सिर्फ आपकी असंतुलित दिनचर्या का परिणाम है | जिसकी वजह से आपका पूरा दिन पेन में गुजरता है, ना आप ठीक से कुछ खा पाते हैं | ना आप कोई काम दिल लगाकर कर पाते हैं पूरे दिन आपको पेट भारी - भारी लगता है | और एक अजीब सी बेचैनी होती है, कब्ज की वजह से आपको कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं | जैसे - बाबासीर, एसिडिटी, अजीरण और गैस, और यदि आपको कब्ज लंबे समय से है | तो यह आपके चेहरे की रंगत को भी खत्म कर देता है इसकी वजह से आपकी स्किन ड्राई हो जाती है | कब्ज होने के कारण - बाहर का खाना, कच्चा खाना ना खाना, बेवक्त खाना, पानी कम पीना, गला - गला भोजन अधिक मात्रा में खाना या अधिक समय तक बैठकर काम करना | लेट खाना खा कर सो जाना या ज्यादा मसालेदार खाना खाना | कब्ज के कारण होने वाली समस्याएं - चेहरे पर पिंपल होना, पेट में गैस बनना, अजीर्ण होना, सर भारी रहना, भूख कम लगना | सुबह उठकर खाली पेट एक कप गर्म पानी में आधा नींबू का रस औ...

Constitution of India | भारत शासन अधिनियम : 1935 | Bharat shasan adhiniyam kya hai ? | Chapter - 5

भारतीय संविधान लूसेंट बुक  Chapter - 5  1935 ईसवी का भारत शासन अधिनियम : 1935 ईस्वी के अधिनियम में 321 अनुच्छेद और 10 अनुसूचियां थी |  इस अधिनियम की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार है - 1. अखिल भारतीय संघ : यह संघ 11 ब्रिटिश प्रांतों, 6 चीफ कमिश्नर के क्षेत्रों और उन देशी रियासतों से मिलकर बनना था, जो स्वेच्छा से संघ में सम्मिलित हो | प्रांतों के लिए संघ में सम्मिलित होना अनिवार्य था, किंतु देशी रियासतों के लिए यह ऐच्छिक था | देशी रियासते संघ मैं सम्मिलित नहीं हुई और प्रस्तावित संघ की स्थापना संबंधी घोषणा पत्र जारी करने का अवसर ही नहीं आया |  2. प्रांतीय स्वायत्तता : इस अधिनियम के द्वारा प्रांतों में द्वैध शासन व्यवस्था का अंत कर उन्हें एक स्वतंत्र और स्वशासित संवैधानिक आधार प्रदान किया गया |  3. केंद्र में द्वैध शासन की स्थापना : इस अधिनियम में विधाई शक्तियों को केंद्र और प्रांतीय विधान मंडलों के बीच विभाजित किया गया | इसके तहत परिसंघ सूची, प्रांतीय सूची एवं समवर्ती सूची का निर्माण किया गया |  (a) परिसंघ सूची...

भारतीय संविधान की पूरी किताब | Indian Constitution full Book in Hindi and English | Constitution of india

भारतीय संविधान लूसेंट बुक  Chapter - 1   भारतीय संविधान के विकास का संक्षिप्त इतिहास :- 1757 ईस्वी की पलासी की लड़ाई और 1764 ई. के बक्सर के युद्ध को अंग्रेजों द्वारा जीत लिए जाने के बाद बंगाल पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने शासन का शिकंजा कसा | इसी शासन को अपने अनुकूल बनाए रखने के लिए अंग्रेजों ने समय-समय पर कई एक्ट पारित किए जो भारतीय संविधान के विकास की सीढ़ियां बनी | वह निम्न  है - 1773 ईसवी का रेगुलेटिंग एक्ट:  इस अधिनियम का अत्यधिक संवैधानिक महत्व है; जैसे -  A. भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों को नियमित और नियंत्रित करने की दशा में ब्रिटिश सरकार द्वारा उठाया गया यह पहला कदम था | अर्थात कंपनी के शासन पर संसदीय नियंत्रण स्थापित किया गया |  B. इसके द्वारा पहली बार कंपनी के प्रशासनिक और राजनीतिक कार्यों को मान्यता मिली |  C. इसके द्वारा केंद्रीय प्रशासन की नींव रखी गई |    विशेषताएं :  1. इस अधिनियम द्वारा बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर जनरल पद नाम दिया गया तथा मुंबई एवं मद्रास के गवर्नर को इसक...

भारत शासन अधिनियम | भारतीय संविधान | लूसेंट बुक | bharat shasan act indian constitution | chapter - 4

भारतीय संविधान लूसेंट बुक  Chapter -4  1919 ईसवी का भारत शासन अधिनियम :   ( मांटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधार ) :  इस अधिनियम की मुख्य विशेषताएं हैं - 1. केंद्र में द्विसदनात्मक विधायिका की स्थापना की गई - प्रथम राज्य परिषद तथा दूसरी केंद्रीय विधानसभा | राज्य परिषद के सदस्यों की संख्या 60 थी ; जिसमें 34 निर्वाचित होते थे और उनका कार्यकाल 5 वर्षों का होता था | केंद्रीय विधान सभा के सदस्यों की संख्या 144 थी, जिनमें 104 निर्वाचित तथा 40 मनोनीत होते थे | इनका कार्यकाल 3 वर्षों का था | दोनों सदनों के अधिकार समान थे | इनमें सिर्फ एक अंतर था कि बजट पर स्वीकृति प्रदान करने का अधिकार निचले सदन को था | 2. प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली का प्रवर्तन किया गया (प्रांतों में द्वैध शासन के जनक "लियोनस  कार्टियस" थे) 3. इस योजना के अनुसार प्रांतीय विषयों को दो वर्गों में विभाजित किया गया - आरक्षित तथा हस्तांतरित या अंतरित |   आरक्षित विषय : वित्त, भूमि कर, अकाल सहायता, न्याय, पुलिस, पेंशन, आपराधिक जातियां, छापाखाना, समाचार पत्र, सिंचाई, जलमार्ग, ख...

भारत शासन अधिनियम और मार्ले - मिंटो सुधार | भारतीय संविधान | marle minto act of indian constitution | chapter -3

भारतीय संविधान लूसेंट बुक  Chapter - 3 1858 ईस्वी का भारत शासन अधिनियम  : इस अधिनियम की विशेषताएं हैं - 1. भारत का शासन कंपनी से लेकर ब्रिटिश क्रॉउन के हाथों में सौंपा गया |  2. भारत में मंत्री पद की व्यवस्था की गई |  3. 15 सदस्यों की भारत परिषद का सृजन हुआ (8 सदस्य ब्रिटिश सरकार द्वारा एवं 7 सदस्य कंपनी के निदेशक मंडल द्वारा) 4. भारतीय मामलों पर ब्रिटिश संसद का सीधा नियंत्रण स्थापित किया गया |  5. मुगल सम्राट के पद को समाप्त कर दिया गया |  6. इस अधिनियम के द्वारा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स तथा बोर्ड ऑफ कंट्रोलर को समाप्त कर दिया गया |  7. भारत में शासन संचालन के लिए ब्रिटिश मंत्रिमंडल में एक सदस्य के रूप में भारत के राज्य सचिव  (सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडिया ) की नियुक्ति की गई | वह अपने कार्यों के लिए ब्रिटिश संसद के प्रति उत्तरदाई होता था | भारत के प्रशासन पर इसका संपूर्ण नियंत्रण था | उसी का वाक्य अंतिम होता था चाहे वह नीति के विषय में हो या अन्य ब्यौरे के विषय में |  ...